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Thursday, May 31, 2012

'विदेह' १०७ म अंक ०१ जून २०१२ (वर्ष ५ मास ५४ अंक १०७) - PART I


                     ISSN 2229-547X VIDEHA
'विदेह' १०७ म अंक ०१ जून २०१२ (वर्ष ५ मास ५४ अंक १०७) NEPALINDIA   
                                            
 वि  दे   विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Read in your own script Roman(Eng)Gujarati Bangla Oriya Gurmukhi Telugu Tamil Kannada Malayalam Hindi
 ऐ अंकमे अछि:-

१. संपादकीय संदेश


२. गद्य


  









३. पद्य











४. मिथिला कला-संगीत१.राजनाथ मिश्र (चित्रमय मिथिला) . उमेश मण्डल (मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव-जन्तु/ मिथिलाक जिनगी)

 

बालानां कृते-१.चंदन कुमार झा- बाल गजल २.डॉ. दमन कुमार झ-एकैसम शताब्दीक पहिल दशकमे मैथिली  बालसाहित्य३.डॉ॰ शशिधर कुमर विदेह

 

भाषापाक रचना-लेखन -[मानक मैथिली], [विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.]



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example

भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी कवि, नाटककार आ धर्मशास्त्री विद्यापतिक स्टाम्प। भारत आ नेपालक माटिमे पसरल मिथिलाक धरती प्राचीन कालहिसँ महान पुरुष ओ महिला लोकनिक कर्मभमि रहल अछि। मिथिलाक महान पुरुष ओ महिला लोकनिक चित्र 'मिथिला रत्न' मे देखू।

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गौरी-शंकरक पालवंश कालक मूर्त्ति, एहिमे मिथिलाक्षरमे (१२०० वर्ष पूर्वक) अभिलेख अंकित अछि। मिथिलाक भारत आ नेपालक माटिमे पसरल एहि तरहक अन्यान्य प्राचीन आ नव स्थापत्य, चित्र, अभिलेख आ मूर्त्तिकलाक़ हेतु देखू 'मिथिलाक खोज'


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ऐ बेर मूल पुरस्कार(२०१२) [साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे कोन मूल मैथिली पोथी उपयुक्त अछि ?
Thank you for voting!
 श्री राजदेव मण्डलक अम्बरा” (कविता-संग्रह) 12.85%  

श्री बेचन ठाकुरक बेटीक अपमान आ छीनरदेवी”(दूटा नाटक) 10.66%  

श्रीमती आशा मिश्रक उचाट” (उपन्यास) 6.27%  

श्रीमती पन्ना झाक अनुभूति” (कथा संग्रह) 5.02%  

श्री उदय नारायण सिंह नचिकेतानो एण्ट्री:मा प्रविश (नाटक) 5.96%  

श्री सुभाष चन्द्र यादवक बनैत बिगड़ैत” (कथा-संग्रह) 5.02%  

श्रीमती वीणा कर्ण- भावनाक अस्थिपंजर (कविता संग्रह) 5.96%  

श्रीमती शेफालिका वर्माक किस्त-किस्त जीवन (आत्मकथा) 8.15%  

श्रीमती विभा रानीक भाग रौ आ बलचन्दा” (दूटा नाटक) 6.9%  

श्री महाप्रकाश-संग समय के (कविता संग्रह) 5.64%  

श्री तारानन्द वियोगी- प्रलय रहस्य (कविता-संग्रह) 5.33%  

श्री महेन्द्र मलंगियाक छुतहा घैल” (नाटक) 7.84%  

श्रीमती नीता झाक देश-काल” (कथा-संग्रह) 6.27%  

श्री सियाराम झा "सरस"क थोड़े आगि थोड़े पानि (गजल संग्रह) 7.21%  

Other: 0.94%  



ऐ बेर बाल साहित्य पुरस्कार(२०१२) [साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे कोन मूल मैथिली पोथी उपयुक्त अछि ?

श्री जगदीश प्रसाद मण्डल जीक तरेगन”(बाल-प्रेरक कथा संग्रह) 48.57%  

श्री जीवकांत - खिखिरक बिअरि 27.14%  

श्री मुरलीधर झाक पिलपिलहा गाछ 22.86%  

Other: 1.43%  

 

ऐ बेर युवा पुरस्कार(२०१२)[साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे कोन कोन लेखक उपयुक्त छथि ?

श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक अर्चिस” (कविता संग्रह) 22.52%  

श्री विनीत उत्पलक हम पुछैत छी” (कविता संग्रह) 8.11%  

श्रीमती कामिनीक समयसँ सम्वाद करैत”, (कविता संग्रह) 6.31%  

श्री प्रवीण काश्यपक विषदन्ती वरमाल कालक रति” (कविता संग्रह) 4.5%  

श्री आशीष अनचिन्हारक "अनचिन्हार आखर"(गजल संग्रह) 24.32%  

श्री अरुणाभ सौरभक एतबे टा नहि” (कविता संग्रह) 6.31%  

श्री दिलीप कुमार झा "लूटन"क जगले रहबै (कविता संग्रह) 8.11%  

श्री आदि यायावरक भोथर पेंसिलसँ लिखल” (कथा संग्रह) 4.5%  

श्री उमेश मण्डलक निश्तुकी” (कविता संग्रह) 13.51%  

Other: 1.8%  

   
 
 

ऐ बेर अनुवाद पुरस्कार (२०१३) [साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे के उपयुक्त छथि?

Thank you for voting!
श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर) 34.44%  

श्री महेन्द्र नारायण राम "कार्मेलीन" (कोंकणी उपन्यास श्री दामोदर मावजो) 13.33%  

श्री देवेन्द्र झा "अनुभव"(बांग्ला उपन्यास श्री दिव्येन्दु पालित) 11.11%  

श्रीमती मेनका मल्लिक "देश आ अन्य कविता सभ" (नेपालीक अनुवाद मूल- रेमिका थापा) 14.44%  

श्री कृष्ण कुमार कश्यप आ श्रीमती शशिबाला- मैथिली गीतगोविन्द ( जयदेव संस्कृत) 13.33%  

श्री रामनारायण सिंह "मलाहिन" (श्री तकषी शिवशंकर पिल्लैक मलयाली उपन्यास) 12.22%  

Other: 1.11%  


फेलो पुरस्कार-समग्र योगदान २०१२-१३ : समानान्तर साहित्य अकादेमी, दिल्ली

Thank you for voting!
श्री राजनन्दन लाल दास 53.52%  

श्री डॉ. अमरेन्द्र 25.35%  

श्री चन्द्रभानु सिंह 19.72%  

Other: 1.41%  

 

1.संपादकीय

साहित्य अकादेमीक टैगोर लिटरेचर अवार्ड २०११ मैथिली लेल श्री जगदीश प्रसाद मण्डल केँ हुनकर लघुकथा संग्रह "गामक जिनगी" लेल देल जाएत। कार्यक्रम कोच्चिमे १२ जून २०१२केँ हएत।
मैथिली लेल विवादक अन्तक कोनो सम्भावना नै देखबामे आबि रहल अछि। ऐ पुरस्कारक ग्राउण्ड लिस्ट बनेबा लेल एकटा तथाकथित साहित्यकारकेँ चुनल गेल जे प्राप्त सूचनाक अनुसार जातिक आ संकीर्णताक आधारपर पोथीक नाम देलन्हि जाइमे नहिये नचिकेताक पोथी रहए, नहिये सुभाष चन्द्र यादवक आ नहिये जगदीश प्रसाद मण्डलक। रेफरी जखन ७ टा पोथीक नाम पठेलन्हि तखन ओइमे चन्द्रनाथ मिश्र "अमर"क अतीत मंथन सेहो रहए जखन कि ओ पोथी निर्धारित अवधि २००७-२००९ मे छपले नै अछि, तँ की बिनु देखने पोथी अनुशंसित कएल गेल? ऐ तरहक ग्राउण्ड लिस्ट बनेनिहार आ बिनु पढ़ने पोथी अनुशंसित केनिहारकेँ साहित्य अकादेमी चिन्हित करए, आ नाम सार्वजनिक कऽ स्थायी रूपसँ प्रतिबन्धित करए, से आग्रह; तखने मैथिलीक प्रतिष्ठा बाँचल रहि सकत।
मुदा ई तँ मात्र प्रारम्भ अछि। साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक असली चेहरा तखन सोझाँ आओत जख ऐ बर्खक मूल साहित्य अकादेमी पुरस्कारक घोषणा हएत।
श्री जगदीश प्रसाद मण्डल जीक "गामक जिनगी" मैथिली साहित्यक इतिहासक सर्वश्रेष्ठ लघु कथा संग्रह अछि। जगदीश प्रसाद मण्डल जीकेँ बधाइ।
सूचना (स्रोत समदिया): जगदीश प्रसाद मण्डल जी केँ हुनकर मैथिली लघुकथा संग्रह "गामक जिनगी" लेल टैगोर साहित्य पुरस्कार २०११ देबाक घोषणा। कार्यक्रम १२ जून २०१२ ई. केँ कोच्चि (केरल) मे। ई पुरस्कार दक्षिण कोरियाक एम्बैसी (स्पॉन्सर सैमसंग इण्डिया लिमिटेड) क आग्रहपर साहित्य अकादेमी द्वारा शुरू कएल गेल अछि। टैगोर साहित्य पुरस्कार गुरुदेव रवीन्द्र नाथ ठाकुरक १५०म जयन्तीक उपलक्ष्यमे शुरू भेल छल। सभ साल ८ टा भाषा आ तीन सालमे साहित्य अकादेमी द्वारा मान्यता प्राप्त सभटा २४ भाषाकेँ ऐमे पुरस्कृत कएल जाइत अछि। मैथिली लेल ई पुरस्कार पहिल बेर देल जा रहल अछि।
गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुरक १५०म जयन्तीक उपलक्ष्यमे साहित्य अकादेमी आ सैमसंग इडिया (सैमसंग होप प्रोजेक्ट) द्वारा २००९ ई. मे स्थापित कएल गेल छल टैगोर साहित्य पुरस्कार। २४ भाषाक श्रेष्ठ पोथीकेँ तीन सालमे पुरस्कार (सभ साल आठ-आठ भाषाक सर्वश्रेष्ठ पोथीकेँ एक सालमे पुरस्कार) देल जाएत। पुरस्कारमे प्रत्येककेँ ९१ हजार टाका आ प्रशस्ति-पत्र देल जाएत। चारिम साल पहिल सालक आठ भाषाक समूहक फेरसँ बेर आएत। टैगोर जयन्तीक लगाति अवसरपर ई पुरस्कार देल जाइत अछि।

टैगोर साहित्य पुरस्कार २००९ (पुरस्कार समारोहक नामवर सिंह, अशोक वाजपेयी, कृष्णा सोबती आ केदारनाथ सिंह द्वारा बहिष्कार कएल गेल छल) बांग्ला, गुजराती, हिन्दी, कन्नड, काश्मीरी, पंजाबी, तेलुगु आ बोडो भाषामे २००५ सँ २००७ मध्य प्रकाशित पोथीपर देल गेल।
-बांग्ला (आलोक सरकार, अपापभूमि, कविता)
-गुजराती ( भगवान दास पटेल, मारी लोकयात्रा)
-हिन्दी (राजी सेठ, गमे हयात ने मारा, कथा संग्रह)
-कन्नड (चन्द्रशेखर कांबर, शिकारा सूर्य, उपन्यास)
-काश्मीरी (नसीम सफाइ, ना थसे ना आकास, कविता)
-पंजाबी (जसवन्त सिंह कँवल, पुण्य दा चानन, आत्मकथा)
-तेलुगु (कोवेला सुप्रसन्नाचार्य, अंतरंगम, निबन्ध)
-बोडो (ब्रजेन्द्र कुमार ब्रह्मा, रैथाइ हाला, निबन्ध)

टैगोर साहित्य पुरस्कार २०१० असमी, डोगरी, मराठी, ओड़िया, राजस्थानी, संथाली, तमिल आ उर्दू भाषामे २००६ सँ २००८ मध्य प्रकाशित पोथीपर देल गेल।

-असमी (देवव्रत दास, निर्वाचित गल्प)
-डोगरी (संतोष खजूरिया, बडलोनदियन बहारां)
-मराठी (आर. जी. जाधव, निवादक समीक्षा)
-ओड़िया (ब्रजनाथ रथ, सामान्य असामान्य)
-राजस्थानी (विजय दान देथा, बातां री फुलवारी)
-संथाली (सोमाइ किस्कू, नमालिया)
-तमिल (एस. रामकृष्णन, यामम)
-उर्दू (चन्दर भान खयाल, सुबह-ए-मश्रिक-की अजान)


टैगोर साहित्य पुरस्कार २०११ मैथिली, अंग्रेजी, कोंकणी, मलयालम, मणीपुरी, नेपाली, संस्कृत आ सिंधी लेल २००७ सँ २००९ मध्य प्रकाशित पोथीपर देल जाएत।
मैथिलीक भिखारी ठाकुररामदेव प्रसाद मण्‍डल झारुदार’” दै छथि माटि आ कहै छथिहमरा बि‍नु जगत सुन्ना छै
मैथिली साहित्य वा कोनो भाषाक साहित्यमे झारु नामक काव्य विधा सुनने रहिऐ? रामदेव प्रसाद मण्‍डल झारुदारजीक झारुकेँ छोड़ि कऽ? नै ने!
कारण रामदेव प्रसाद मण्‍डल झारुदारमहीसक पीठ, खेतक आड़ि-धूर आ रस्ता चौबटियापर स्वतः स्फूर्त जे नव विधाक आविष्कार केने छथि से समाजक दुर्गुणकेँ खरड़ासँ खरड़बा लेल छै। फुलझाड़ूसँ खरिहान नै बहारल हएत, आ खरड़ा सँ ओसारा नै बहारि सकै छी। लाठीमे राहड़िक डाँटक झारुसँ झोल-झाल साफ कएल जाइए। से तरह-तरहक बाढ़नि, आ खरड़ाक प्रचलन अछि। रामदेव जी गीत सेहो लिखै छथि, आ पनिसोखा सन रंग बिरंगक झारु सेहो। जेहेन समस्या तेहने झारु। आ मैथिलीमे जखन गोत्र-मूलक उपनाम रखबाक प्रवृत्ति किछु नव आ पुरान लेखकमे देखल जा रहल अछि तखन ईझारुदारउपनाम की सभ बिनु कहने कहि जाइए?
आ कविक आत्मविश्वास, हम नै तँ किछु नै।
हमरासँ पहि‍ले कोनो नै शासन।
नै छै कोनो धर्मक वि‍धान।।
हमरा बि‍नु जगत सुन्ना छै।
हटैबला छै पशु समान।।
आब ताकि लिअ ऐ झारुमे बौद्ध दर्शनक शून्यवाद आ शंकरक अद्वैत दर्शन!
हुनका पैसाक रोग नै चाही तँ अंध्विश्वासक रोग सेहो नै।
सभ बनल छै पैसा रोगी,
अन्‍धवि‍श्वास, कुरीतक जोगी
मुदा ऐ लेल रामक तीर कमान चाही की? कारण तइ लेल तँ रामक अवतारक प्रतीक्षा करए पड़त। नै, स्वयंपर करू विश्वास, कारण जँ समस्या अहाँ छी तँ समाधान सेहो अहीं।
अहाँ बि‍ना के ई दुख हरतै
अहींसँ ई सभ दानव मरतै
कलमकेँ एक बेर फेर बनाबू
रामक तीर कमान यौ।   

आपसी एकताक महत्व कवि नीक जेकाँ बुझै छथि, मुदा एकता कोना आओत, तकर समाधान देखू:
एकता बनैले सहए पड़ै छै
घटो लगा कऽ बहए पड़ै छै
अपन गलतपर लहए पड़ै छै।
नारीक स्थिति, से ओ नारी गामक होथि वा नेता ने किए बनि गेल होथि, अखनो टीस उठबैत अछि, आ कवि जँ झारुदार होथि तँ ओइ टीसक वर्ण एना होइत अछि:
नारी सीता राधा अंश,
पुरूष बनल छै रावण कंश।
फेर कोना कऽ चलतै,
ई घर दुनि‍याँदारी यौ।

मुदा तकर उपाय, की पुरुष बदलत नारीक दशा? नै, ई आत्मविश्वास स्वयंनारीमे छन्हि, ओ शिक्षाक डोर पकड़ती आ
आब नै नारी रहब अनारी,
बनबै सख्‍त कठोर यौ। ना....
तँ की वएह नारी, जाति-पाति आदिक समस्या टा पर ध्यान छन्हि कविक? नै, ओ प्रदूषण सन विज्ञानक देनपर सेहो चिन्तित छथि:
वि‍ज्ञानक ई देन प्रदूषण
बनि घर घुसल चुहार यौ।
बाघ बनि‍ ई मुँह बौने अछि‍
दुि‍नयाँ बनल सि‍कार यौ

आ प्रदूषण कोना कम हएत, सेहो नव खाढ़ीकेँ राह देखबै छथि:
इंजन हो पूरा कंडीसन
धुआँ नै छोड़ै बेकार यौ।
करू खि‍याल कि‍छु अगि‍ला पि‍ढ़ी
कोना रचत संसार यौ।
आ ऐ पर हुनकर एकटा झारु सेहो छन्हि, ओ वने टा नै वनवासीक सेहो संरक्षण चाहै छथि:
वन झी‍ल नदी आ वनवासी
पहार पठार संग रेगि‍स्‍तान।
करू सुरक्षा पर्यावरण केर
ऐ सँ देश बनत धनवान।।

दहेज आ काटर प्रथापर रामदेव जी लिखै छथि:
आइ हर घरमे सीता रोऐ छै
राइत-राइत भरि‍ नै जनक सुतै छै
कतए सँ एतै दहेजक पैसा
हेतै केना कन्‍यादान यौ

मिथिलापर झारुदारकेँ गर्व छन्हि, कोन मिथिलापर:
जगतरनी जतए गंगा धारा, ज्‍योति‍ लि‍ंग केर जतए उज्‍यारा।
हजरत तुलसी बाल्‍मि‍कक गुँजि‍ रहल उपदेश।

मुदा बिहार अन्तर्गत जे मिथिला छै तकर दशापर झारुदार चिन्तित छथि आ बिहारक मुख्यमंत्री नीतिश कुमार, जे विकास पुत कहल जाइ छथि हुनका झारुदार किछु देखबऽ चाहै छथि:
केमरासँ तस्वी‍र बनेबै
मि‍थिला मैथि‍ल परि‍वार केर।
तकरा देखेबै पटना जा कऽ
वि‍कास पुत नीि‍तश कुमारकेँ।
फोटो बनेबै खेत असि‍ंचि‍त
सि‍ंचाइ पानि‍ वि‍जलीसँ वंचि‍त।

मानवता ककरामे हेतै, मानवे मे ने। आ तकरे ने भेटतै दुनियाँक ताज आ सएह ने जीतै बनि झारुदार!

ताज मि‍लै सम्‍पूर्ण जगतक
आ बनि‍ जीबए झारूदार
मानवमे मानवता होइ तँ
बदलै नै ओकर अवतार

तँ झारु आ गीत, जे बोन-झाँकुरमे खेत-पथारमे घुमैत-फिरैत लिखाएल से तँ विशिष्ट हेबे करतै आ ओकर लिखैबलाकेँ से ताज भेटबे करतै। मिथिलाक भिखारी ठाकुर ओइ ताजकेँ पहीरि झारुदार कहेबे करतै।



उमेश पासवानक कविता संग्रहवर्णित रस
कविकेँ युवापर भरोस छन्हि, आ तेँ युवाकेँ सम्बोधितो करै छथि आ आह्वानो करै छथि।
 हम युवाकवितामे
जाति‍-धर्म
मजहब केर नामपर
षडयंत्र रचैए कि‍यो
हमर देशकेँ
भीतर आबि‍ कऽ
आतंकवादक
गाछ रोपैए कि‍यो
आ तकर सम्बन्ध हुनकरजीतक झण्डाकवितामे
जरै जाउ
वतनक दुश्‍मन
आगि‍ सुनगाएल करू
देखबामे अबैए। ई जे दुश्मन अछि सएह फहरबाबइए जीतक झण्डा
जरै जाउ
वतन केर दुश्‍मन
आगि‍ सुनगाएल करू
जीत केर झंडा
फहराएल करू
हम युवामे सेहो ओ कहै छथि
आतंकवादक
गाछ रोपैए कि‍यो
भारतवासी शेर छी
शेरकेँ मादमे
आबि‍ कऽ जगबैए कि‍यो
कारण जे देशक युवा छथि से
हम छी गोली, हम छी बारूद
हमही खंजर तलवार छी

तखन ऐ गोली लेल पेस्तौल, बारुद लेल आगि के छथि? ओ छथि युवा जे छथि खंजर आ तलवार।
तँ की दुश्मनी आधारित जोश छन्हि हुनकर कविता? नै से नै अछि-
जौं दोस्‍तीक लेल हाथ बढ़ाएब तँ
हमही फूलक माला
गला केर हार छी

कविकेँ टंगघिच्चा-घिच्चीक खेल नै पसिन्न छन्हि। आ कवि कहै छथि।
ऊपरसँ नूनू बौआ
भि‍तरे-भि‍तर
कहैए बकलेल
बर्षोसँ देखि‍ रहल छी
हर तरहसँ
दलि‍तक उपेक्षा

बाढ़िक प्रकोप कविकेँ कहबापर विवश करै छन्हि:
केना कऽ ऐबेर
खेतक आड़ि‍पर जा कऽ
कहब सेर-बरोबरि‍
उखैर सन बीट
समाठ सन सि‍स


गबहा संक्रान्तिपर कविकेँ कहऽ पड़ै छन्हि:
केना कऽ गुजर चलत
उपजा कऽ कास-पटेर


ओ कोसीकेँ कहै छथि:
कऽ देलि‍ऐ मि‍थि‍लाकेँ दू-भागमे अहाँ
पूबमे सहरसा-सुपौल
पछि‍ममे मधुबनी-दरभंगा
बि‍चमे अगबे बालु आ धूल
मुदा फेर निर्मल्लीक पुल बनबाक चर्च:
कहू आब कतेक चुप रहब
ऐबेर हम बना देलौं पुल


पढ़ल-लिखल दलितक सामान्य दलितक प्रति व्यवहारपर जतेक अम्बेडकर दुखी रहथि ततबे चिन्ता उमेश पासवानकेँ सेहो छन्हि:
स्‍वयं दलि‍त छी
दलि‍तक दरद जनै छी
कि‍छु व्‍यक्‍ति‍क
कि‍रदानीसँ चकि‍त छी
दलि‍त भऽ कऽ ओ
व्‍यक्‍ति‍ अपनो समाजकेँ
बि‍सरि‍ गेल
अप्‍पन भाषा-भेष छोड़ि‍ कऽ
दोसरक रंग-ढंगमे ढलि‍ गेल

ओ समाजसँ पुछै छथि:
हम दलि‍त छी
मेहनति‍-मजदुरी
कए कऽ बि‍तबै छी
अपन जीवन
तैयो जरैत अछि‍

कवि जगदीश प्रसाद मण्डल जी सँ प्रभावित छथि आ से ओ एकटा कविताक माध्यमे कहै छथि:
हम छी सेवक
मैथि‍ल
जगदीश बाबूक
चेला
नै हमरा लड़ू खि‍यौलनि‍
नै देलथि‍ मि‍श्रीक ढेला

मुदा हास्यसँ ओ दूर नै गेल छथि:
झोटा झोटौबलि‍
हेतौ नटि‍नि‍या
तोरा संग अही बेर गे

वसन्तक आगमनसँ मात्र फूल-पात नै आन-आन जीवनसँ सम्बन्धित वौस्तपर ध्यान जाइ छन्हि हुनकर:
गाछ-वृक्षमे
नव कनोजरि‍क संग
मोजर फूल ि‍नकलैत अछि‍
खेतमे गहुम-खेसारी
ति‍सी-मसुरी
तोरीक फूलसँ
समुच्‍चा बाध गमकैत अछि‍
मधुमाछी लगौने
सेनुरि‍या आमक गाछपर छत्ता
देखि‍ कऽ लुक्‍खी डरैत अछि‍
अरहुलक फूल चूसि‍ कऽ
फुलचोभी चि‍हुकैत अछि‍
कौआ आ कोइलीमे
भेल अछि‍ कनाइर

पानि नै चलबाक गप नै बुझाइ छन्हि हुनका:
देहसँ देह
केना छुबाइ छै
कि‍एक नै चलैए
हमर छुअल पानि‍ यौ
कोन जुलुमक सजा
हमरा दऽ रहल छी
कि‍अए बुझै छी
हमरा अपमानी यौ

सुदामा आ कृष्णक दोस्तीकेँ सभ अलग कऽ देलक:
दुनू दोसकेँ अलग कऽ देलक
लोक अप्‍पन रास्‍ताक दि‍वार जकाँ
हँसैत खेलैत...

आ ई दशा किए भेल?
सहलौं सभ कि‍छु
सलहेशक संतान रहि‍तो
जहि‍या तक चुप रहलौं हम

आ कहै छथि:
कतेक लि‍खब
दलि‍तक बेथा
सलहेश गामक संदेश।


मुदा की मिथिलाक भाषा संस्कृति ककरो अनकर छी? नै ई तँ हमर छी आ तै पर गर्व करै छथि कवि:
हरक पाछाँ बगुला घुमैए
हरबाहा जोरसँ
बरदकेँ बाबू भैया कहि‍ हँकैए

देशक विकास आ नेता पर हुनका आक्रोश छन्हि:
ऐठामक नेता छै माला-माल
रोड-सड़ककेँ देखि‍यौ तँ
कदबा गजार सन छै थाल

आ जे बड़का-बड़का राष्ट्रीय राजमार्ग (नेशनल हाइवे, एन.एच.) छै से तकर विवरण किछु एना छै:
मौतक चौराहा बनल अछि‍
एन.एच भुतहा मोड़।

आ लोकक दशा-दिशापर मुर्दा सेहो चिन्तित अछि:
गारल मुर्दा छटपटा रहल अछि‍
भि‍तरसँ अंगुरी
अप्‍पन उठा रहल अछि‍

नारीक कर्मनिष्ठ स्वभावपर हिनकर लेखनी खूब चलल छन्हि:
ओमहर बि‍आ जे उखारै छै
महि‍ला जन
कोइ करै छै, सासु-ननदि‍क नि‍ना-बि‍ना
कोइ गबै छै सोहर-समदाैन
कवि तुकमिलानीमे सेहो ढेर रास गप कहि जाइ छथि, पंजाबमे होइत मजदूरक पलायनक चर्च देखू:
जौं अखार महि‍नामे
बुढ़ बड़द, पजरामे दरद
पंजाबमे मरद अछि‍ तँ समझू
हे गेलहे घर छी।

ओ आह्वान करै छथि:
साहि‍त्‍यक दलि‍दर
कतेक जुलुम करैए हमरापर
कि‍यो तँ बाजू
कि‍यो हमरा दि‍ससँ अवाज उठाउ

आ अधिकार तँ चाहबे करी:
अप्‍पन सोल्‍हनी बला रसा
आब नै सुनब हम

बर्खा तोड़ि दैए बान्हकेँ आ बना दैए गाम केँ कोसी आ कमला:
लधने छल सतहि‍या
ढौसाबेंग
कि‍ड़ी-मकौड़ी
करै छल सोर
भुरुकुबा कनी उगल छल
चुह-चुहि‍या


तँ की कहल जाए ऐवर्णित रससभकेँ। की कविक वसन्त मात्र फूल-पात देखैए जे मात्र सुगन्ध दैए, आँखिकेँ सुख दैए, मुदा जरल पेटकेँ से नीक लगतै? ते कविक वर्णित वसन्तक रस ओ फल विहीन सुन्दर फूल नै भऽ सकैए, आ से नहिये अछि। दलित विमर्श दलित द्वारा, आ ओइ दलित द्वारा जेकर धुआधजा छै सलहेश सन, नै बिसरल अछि अपन संस्कृति, बोली-वाणी, नै बिसरल अछि सोहर-समदौन। आ से छथि उमेश पासवान। आ जे हुनकर वसन्तकेँ देखबाक, एन.एच.क चौराहाकेँ देखबाक दृष्टि फराक अछि तेँ हुनकर कविता सेहो फराक अछि।

रथक चक्का उलटि चलै बाटई रामवि‍लास साहु जीक कविता, हाइकू, शेर्न्यू आ टनका संग्रहक नाम अछि। खाँटी शब्दावलीक प्रयोग आ ओइ माध्यमसँ तीन पाँतिक हाइकू आ पाँच पाँतिक टनकामे हिनकर प्रकृति-प्रेमक माध्यमसँ भावोद्गार एतेक रास तथ्य सोझाँ अनैए, समस्या आ समाधान तकैए जे पढ़निहार बाजि सकैए, हँ ई हम किए नै सोचि सकलौं, मुदा आब सोचि सकब।
रथक चक्‍का
उलटि‍ चलै बाट
चाक चलै छै
ठामे ठाम नचैत
दुनु करै दू काम

जापानक बाशो नै मोन पड़ि जाइ छथि रामविलास साहु जीक ऐ टनकासँ:
सावन मास
जलक बुन्‍न पड़ै
आसमानसँ
बेंगक बाजा बजै
खन्‍ता डबरा भरै

हिनकर मानव आ प्रकृतिक मेल कतेक अद्भुत लगैत अछि:
कारी काजर
मुखड़ा ि‍बगारैत
कारी कोइली
मधुर गीत गबै
सभकेँ ललचाबै

मुदा कारी काजरक उपमा एतै खतम नै भेल अछि:

कारी काजर
आँखि‍ देत सुखाय
कारी बादल
बरखासँ डुबाय
मुखरा देत बि‍गाड़ि‍


रौदक गुण तँ प्रकृति-प्रेमी कवि पढ़ि लैए, वसन्त आ हेमन्त वर्णनासँ की ई कम अछि?

चैतक रौद
तपाबै माटि‍-पानि‍
पछि‍या हवा
पकाबै चना-गहुम
बहारै धूर-कण



कविता कहैमे कवि सेहो पाछाँ नै छथि, कोसी धार हुनका हिलोरै छन्हि:

जि‍नगी बनल अछि‍ हमर कंगाल
झौआ, पटेर, काश खगरा हमरासँ करैए रगड़ा
बाल बच्‍चाक जि‍नगी बाउलमे समाएल

अन्धविश्वासपर कविक कलम चलै छन्हि:

गाेसाँइ खेले भगता-भगति‍नि‍याँ
छत्तीस देवी चौदहो देबान
अखन छौ देहपर ि‍वरजमान
जे मांगब से पूरा करतौ
कारनीक सभ रोग वि‍याधि‍ हरतौ
फूल-अच्‍छतसँ वरदान देतौ
बि‍गरल काज मनोकामना
चुट्की बजि‍ते पूरा करतौ
बदलामे लड्डु-छागर-पाठी मांगतौ


कवि किसान छथि तँ किसानी कोना बिसरताह:
बि‍हानेसँ गजार कदबा
हुअए लगल खेत
हर जोतैत हरबाह
बि‍रहा गाबैत

आ फेर
हरक नाश आ
खेतक चासपर
पेट भरबाक अछि‍
सभकेँ आश।

आ तखन……

गहुमक दाना कोठीमे भरलौं
भूसीकेँ भुसकाँरमे टलि‍येलौं
चारि‍ मासक गहुमक फसलि‍
दि‍न-राति‍ खटि‍ कऽ घर केलौं
साल-भरि‍ रोटि‍यो खाए जीअब


गामक शब्दावली फकरा-कहबीक माध्यमसँ बहुत रास गप कहि जाइ छथि कवि:

हाटक चाउर बाटक पानि‍
बनि‍याँ घरक तरजूकेँ
नै होइ छै कोनो माइन

कारण..
हाटक चाउर बाटे बि‍लाएल
घाटक पानि‍ घाटे सुखाएल
 

देशी इलाज आ रोगक रोकथाम सेहो कविकेँ बुझल छन्हि:

इचना, पाेठी माछक चटनी
संगे जे खाइ मरूआ रोटी
नहि‍ बनत रोगी मोटी
रक्‍तचाप, मधुमेह, जलोदर


रामवि‍लास साहु जी चैतावर गबै (लिखै) छथि, बिरहा सुनै छथि, धनरोपनीपर आ किसानीपर कविता कहै छथि। आ ऐ सभ विषयपर हिनकर कविताक जोड़ा साहित्यमे भेटब कठिन। ई सभ विषय मैथिली कविताकेँ विस्तार देलक अछि, आ ओइपर लिखबाक सामर्थ्य रामवि‍लास साहु जीमे छन्हि, ओकर भीतरमे ढुकि कऽ लिखबाक सामर्थ्य रामवि‍लास साहु जीमे छन्हि।





उमेश मण्डल जीकनिश्तुकीकविता, लघु-कविता, हाइकू/ टनका आ गजलक संग्रह थिक। मैथिलीक नव तुर मात्र उमेरकेँ प्रतिष्ठा नै देबऽ चाहैए, जँ ओ उमेर अग्रगामी नै होथि। आ से हेबाको चाही, काजक सम्मान छै उमेरक आ पुरानक नै। आ तेँ पुरान आ उमेरगर जँ अग्रगामी छथि तँ तिनका प्रतिष्ठा किए नै भेटन्हु?
ई टनका देखू:

समस्‍या आप्‍त
सोलहनी सजल
साहि‍त्‍यकार
लेखे पुरान छै आप्‍त
केना एतै यथार्थ

आ तेँबूढ़ाढीमेलघु कवितामे ओ कहै छथि:
जीनगी चाह करैए
कर्मक बाट देखबैए

आ कर्मका बाट जँ पकड़ि लेब तखन धुधुएबे करब:

भुरकी-सँ-भार बनि
बील बोहरि‍ धरि‍
बनि‍-बनि‍ असंतोष
धोधरि‍ बनि‍ धुधुआ रहल अछि

मिथिलासँ पड़ाइन भऽ रहल छै। से रहि-रहि कचोटै छन्हि कविकेँ। आ जँ वसन्तक आगमन भऽ जाए तखन तत्व ज्ञान भैये ने जाएत!
बसंत आएल
गाम जाएब
आब एतए
रहि‍ नै पएब
बसंतेक खोजमे तँ
छी बौआएल

ऐ पड़ाइनसँ:-
गामक मुँहथरि‍
जंगल बनल अछि‍


हुनका विचारक फाँट सेहो रहि-रहि देखा पड़ै छन्हि:
अहाँक गप
अपन मन
दुनू मि‍लैए
मि‍लि‍ दुनू अछि‍ चौचंग
खोजि‍ रहल अछि‍ वसंत
मुदा
बसंतक चि‍ड़ैकेँ
संग नै राखए चाहै छी हम


हुनका बुझऽमे आबि रहल छन्हि :
भकोभन ओइ अन्‍हार कोठरीमे

आ ओ अहाँसँ पूछि रहल छथि:

तखन शीशामे केना देखाएत
ओकर चि‍त्र केना आएत?
आ कियो नै सुनऽ चाहै छथि ओ गीत जतऽ मात्र आ मात्र गाओल जा रहल अछि संस्कृतिक गीत:
हनहनाइत, भनभनाइत ओइ स्‍वरकेँ
सुनैले नै‍ छथि‍ कि‍यो तैयार

किए नै सुनै लेल छथि तैयार, कारण अछि डर, दर्दक डरे ओ नै सुनऽ चाहै छथि हनहनाइत, भनभनाइत ओइ स्‍वरकेँ।

किछु अजीब बात सभ हुनका असहज लगै छन्हि:
आगि‍-पानि‍केँ
मनक माइनकेँ

कारण सेहो छै, अगिलहीक बिम्ब देखू:
सप्‍पत खाइ काल देवता
लोकक घर जड़बैकाल मि‍त्ता

ज्ञान आ ज्ञानी आ ज्ञानक प्रकाश सेहो हुनका कखनो ओझरीमे धऽ दै छन्हि:
ज्ञानो भऽ जाइत अछि‍ गुलाम
सांकृत्‍यायन पड़ै छथि‍ मोन घराम

लहास जे अहाँकेँ बुझा पड़ैए सेहो आब बाजत:
आब ओ बाजत
बजैत-बजैत हँसत
अहाँक कृति‍पर
बनल संस्‍कृति‍पर

मंगल आ मंगला हुनकर कवितामे सेहो कएक ठाम आएल अछि। विवशताक प्रतीक अछि मंगला!

कातमे ठाढ़ भऽ मंगला
आ आगाँ
अपनाकेँ केलक एकोर
तँ सुखाएल घाटक घटवारी मंगलापर देखू ओकर विवशता:
सुखलौ घाटक लेतै खेबाइ
नै देबै तँ देत ई रेबाड़ि।
सएह भेल मंगला घुरि‍ गेल
पछि‍मे मुरि‍‍ गेल

कवि कुम्हरौटक बिम्ब एना अनै छथि:
काँच माटि‍क मूर्ति जहि‍ना
ढाॅचा मात्र कहबैए।
तहि‍ना तँ फूलोसँ बनल फल
सि‍रखार मात्र कहबैए।
आ वएह सि‍रखार ने आशा बान्‍हि‍-बान्‍हि‍
रौद-बसात सहैए

आ अपने सन आर बटोही सेहो हिनका भेटि जाइ छन्हि:
हमरे सन इहो सभ बटोही
हराएल बाट बढ़ए चाहैए

कविकेँ कोनो भ्रम नै छन्हि जे जेहने बाट चलब तेहने घाट भेटत आ तखन ओइ घाटपर पानि सेहो तेहने भेटत:
जहि‍ना चलैक बाट होइ छै
तहि‍ना तँ बुझैयोक बाट छै
जेहेन जे बाट चलै छै
तेहने घाट पहुँचै छै

ई बाट आ विचार हुनकर एकटा आरो कवितामे अबैत अछि:
वि‍चारक संग जँ चालि‍ रहल
घाटपर जाइसँ कि‍यो नै रोकत

आ नीक वा अधलाह बाट कियो केना धरैए, तहूपर हुनकर लेखनी चलै छन्हि:

जेहने घरक लोक रहै छै
घरक मुँहथरि‍ तेहने होइ छै।
जेहने घरक मुँहथरि‍ रहै छै
तेहने ने बाटो धड़ै छै

आ ई बाट हुनकर पछोड़ गजलमे सेहो नै छोड़ै छन्हि:
गोर मौगी गौरबे आन्हर भेलि‍ अड़ल
करि‍या बाट बुझाइए चलू घुरि‍ चली

ओ निराश कखनो नै होइ छथि:
मरलेमे मारि‍ खा-खा
मारल बुइध कहबै छी
आ एकर कारण छै, ओ कहै छथि:
जहि‍ना पबि‍ते अद्राक पानि‍
मुइलहो धार जीबै छै।
भलहि‍ं जीतहा धार बीच
तीन-मसुआ ओ कहबै छै

आ ऐ आशा-आक्रोश आ निराशाक मध्य ओ लिखै छथि:
छोड़ि‍ देने टूटि‍ जाएत समाज अपन
उमेश जोड़तै तँ चहकतै लगैए ई‍।


उमेश मण्डल जे किछु कहै छथि निश्तुकी कहै छथि, घुरछी, ओझरी सभटा चारू कात पसरल छन्हि। मुदा सोझराबै छथि, ओझराबै नै छथि।


माँझ आंगनमे कतिआएल छीमुन्नाजीक रुबाइ आ गजल संग्रहक नाम अछि। कतिआएल आ सेहो माँझ आंगनमे! की कबीरक उलटबासीक प्रभाव अछि ई आकि गजलक स्वभाव अछि ई? नहिये ई कबीरक उलटबासीक प्रभाव अछि नहिये ई गजलक स्वभाव अछि, ई एकटा यथार्थ अछि। मुन्नाजी सन कतेको लोक कतिआएल छथि, प्रतिभा अछैत हेराएल छथि। मुदा गजलकार सभटा दोख अपनेपर लऽ लै छथि।
आब तँ माँझ आँगनमे कतिआएल छी
अपने चालिसँ आब बेरा गेलहुँ हम
आ सएह कारण अछि जे ओ नोरक सुख भोगऽ लागै छथि।
नोर तँ खसैए मुदा मजा सन लगैए
केहन नीक प्रेमक दुख लेलहुँ हम

बड़का खाधिमे खसै छथि आ तहू लेल अपनेकेँ दोखी मानै छथि:
छोटको ठेससँ नै सबक लेलहुँ हम
तँए बड़का खाधिमे खसि गेलहुँ हम


तँ की गजलकार प्रेमक महत्व बिसरि गेल छथि, नै प्रेम तँ सभकेँ चाही।
सभ उमेर वर्गकेँ प्रेम चाही
मरितो धरि कुशल-छेम चाही

आ हिनका जँ कोस दू-कोस मात्र चलबाक रहितन्हि तखन ने, हिनका तँ बहुत आगाँ बढ़बाक छन्हि तेँ प्रेम चाही।
डाहसँ पहुँचब कोस-दू कोस
आगू बढ़बा लेल तँ प्रेम चाही

आ से सभ ठाम। एकटा हमर संगी छल, एकटा परीक्षामे टॉप केलक तँ बाजल- नै कम्पीट करै छी तँ नै करै छी, आ करै छी तँ टॉप करै छी। ओ गजलकार नै छल जँ रहिते तँ अहिना लिखितए:
बदरी लादल रहै कोनो बात नै
जदि बरसी तँ बरिसात बनि कऽ

आ नजरि-नजरिक फेर आ हाफ ग्लास फुल ई दुनूटा अवधारणा ऐ रूपमे ओ राखै छथि:
नजरि उठा कऽ देखबै तँ खाली बुझाएत ई दुनियाँ
नजरि गरा कऽ देखबै तँ सभ देखाएत ई दुनियाँ

समालोचना आ विरोध दुनूकेँ गजलकार नीक मानै छथि।
पक्षधरसँ राखू अपनाकेँ बचा कऽ
विपक्षीक सभ बातकेँ नै तीत बुझू

महगाइसँ लोक बेकल अछि मुदा तकरा लेल झुमैत मचानक बिम्ब देखू:
महगाइसँ खूने नै हड्डियो सुखाइए
आब झुलैत मचान सन लगैए लोक

आ ई उलटबासी देखू, बिम्ब नव, भावना शाश्वत:
हम तँ घूर जड़ेलौ गर्मी मासमे
मिझाएल आगिसँ पसाही कहियो

ई कोन गोष्ठी छी जे अछि कोन पत्रिकाक प्रायोजित चिट्ठी छपबाक राजनीति सन, ई रुबाइ देखू:
मोन भए उठल दुखित होहकारीसँ
उठि दर्शक भागल मारामरीसँ
प्रायोजक तँ पथने रहल कान अपन
कर्ता देखार भेला जतियारीसँ

मुदा बाढ़िक विषय जँ मैथिली गजलक अंग नै बनए तँ बुझू जे गजलकार समाजसँ कतिआएल छथि। मुदा से नै अछि।
धार एखन धरि तँ उफानपर अछि
लोक ताका-ताकी करैत बान्हपर अछि

आब पड़ाइन घटल अछि, मिथिलासँ पड़ाइन। बाहरी लोक बिहारीकेँ मजदूर आ श्रमिकक पर्यायवाची मानि लेने छथि। तहूपर गजलकारक कलम चलल अछि।
बिहारक सिरखारी बदलि गेल सन लगैए आब
श्रमिक घटलासँ कंपनी-मालिक लगै बिहारी जकाँ

मुन्नाजीक गजल आ रुबाइ स्वच्छन्द रूपसँ बमकोला जेकाँ बहल अछि। शेरक स्वभाव होइ छै जे जँ ओकरा नेकासँ कहल जाए तँ आह-बाह लोक करिते अछि। मैथिलीमे गजल-रुबाइ जइ तरहेँ प्रसारित भऽ रहल अछि से देखि कऽ यएह लागि रहल अछि जे जतेक ई विधा अपनाकेँ पसारि रहल अछि तइसँ बेशी मैथिली लाभान्वित भऽ पसरि रहल अछि।

मुन्नाजीक मैथिली विहनि कथाक संग्रहप्रतीकविहनि कथाक प्रतीकात्मकताक प्रतीक बनि गेल अछि। बिरारसँ विहनि उपारि धान आ मेरचाइ रोपबाक प्रक्रिया ऐ संग्रहक सभ कथा सभमे देखमामे आओत। तेँ ई छिटुआ नै रोपुआ धानक खेती बनि गेल अछि आ तीन मोनक कट्ठा सभ गोटे सुनैत होएब, मुदा एतऽ देखब।
विहनि कथा हास्य कणिका नै अछि, ई कथाक जड़ि अछि बीआ अछि, छिटुआ धानसँ भेल पौध आ विहनिसँ भेल पौधमे बड्ड अन्तर छै। छिटुआ धान फौदाइ नै छै। से हास्य कणिका बिठुकट्टा होइ छै, ऐ मे हँसी अबै छै, मुदा ओ छिटुआ धान जेकाँ अछि। दोसर बेर ओइ बिठुकट्टा कथाकेँ, हास्य कणिकाकेँ सुनब तँ ने हँसिये लागत आ नहिये छगुणते। तखन जँ बिनु सिझने विहनि कथा लिखाएत, बिनु सिझेने विहनि कथा लिखब तँ लतीफा बनबे टा करत। आ हास्य कणिका विहनि, लघु आ दीर्घ कथा वा उपन्यासमे लेखकीय सामर्थ्यक अनुसार प्रयुक्त होइत रहल अछि आ होइत रहत।
मुदा उसना धानसँ बिराड़मे विहनि नै बहराएत। से बिनु उसीनने बीआ बाउग करऽ पड़त। बिनु उसीनने सिझाबऽ पड़त आ तइ लेल बेशी मेहनति करऽ पड़त। आ बीआ छीटब तैयो सभ धानसँ विहनि नै बहराएत किछु सँ नहियो बहराएत। से विहनि कथाकेँ सफल हेबाक प्रतिशत कम छै, लघुकथाक सफलताक प्रतिशत कने बेशी छै, दीर्घ-कथा आ उपन्यासक सफलताक प्रतिशत आर बेशी छै। मुदा उपन्यास झंझटिया काज छै, मोन घोर कऽ दै छै, बेशी समए लागै छै। विहनि कथा धाँइ-धाँइ लिखाइ छै। मुदा जहिना कविता लेल आवेग चाही तहिना विहनि कथा लेल, नै तँ ने धाँइ-धाँइ लिखेबे करत आ पद्यक गद्य आ गद्यक पद्य बनबाक आशंका सेहो रहत। सभ उपन्यासकार कतेक रास विहनि उपाड़ि कऽ सजबैए, उपन्यास गद्य छिऐ मुदा ओइमे कोनो पात्र जँ गीत गाबऽ लागए तँ ओकरा अहाँ रोकि देबै? जे उपन्यासकार रहैए ओ विहनि देखि उपन्यासक धनखेती देखऽ लगैए, कखनो ओ विहनि कथा लिखियो दैए, फेर लोभ संवरण नै भेलासँ ओइ विहनिक प्रयोग उपन्यासमे, दीर्घकथामे, लघुकथामे सेहो करैए।
तखन मुन्नाजीक विहनि कथाक की विशेषता। मुन्नाजी हमर पड़ोसी सुरजु भाइ छथि, ओ बिराड़मे जतेक बीआ लगबै छथि ओकर दशो प्रतिशत अपन खेतमे नै लगा पबै छथि। बाढ़िक इलाका छै से लोकक खेत पड़ल रहि जाइ छै बिनु विहनिक। से सुरजू भाइक पड़ोसी ओइसँ लाभ उठबै छथि कारण बाढ़िमे कखनो काल तीन-तीन बेर धनरोपनी होइ छै, एक बेर रोपू बाढ़ि आएल, दोसर बेर रोपू फेर बाढ़ि आएल। आ सुरजू भाइ छथि तेँ लोक निश्चिन्त रहैए।
आ मुन्नाजीक विहनि कथा सेहो निश्चिन्त करैए।
रेवाजविहनि कथा लिअ। गाम घरमे मसोमातकेँ लोक डाइन कहै छै मुदा मुइलाक बाद घराड़ी लेल ओकरा आगि देबा लेल उपरौंझ होइ छै। एतऽ मुदा विहनि लेल जे बीआ छीटल गेल छै से कने उच्च स्तरक छै। एतऽ मृतककेँ बेटा नै छै मुदा पत्नी आ बेटी छै। से जखन मृतकक भाइ कोहा उठबऽ चाहैए तँ विधवा ओकरा रोकै छै आ बेटीकेँ कोहा उठबैले कहै छै। आ संग के देत ऐ नव रेवाजमे, जे आइयेसँ प्रारम्भ भेल अछि। तखन उत्तरो भेटैए- निपुतराहा सभ।

तहिनाकमरुनिसाविहनि कथा अछि। हसीना मंजिल सन एकटा आरो श्रेष्ठ उपन्यास ऐ विहनि कथा (सीड स्टोरी)सँ मुन्नाजी नै बना सकै छथि की? कमरुनिसाक पिता रहमान। लहठीक काज जेकाँ दम्मा सेहो ओकर सभक पुश्तैनी वौस्त छलै। कमरुनिसाक अब्बा-अम्मीक जान ई दम्मा लेलकै आ फेर कमरुनिसा
जिया जरए सगर रातिमे एड्सक समस्या आ लिविंग रिलेशनक चर्च अछि तँदियादमे पनहीक ऊपरसँ चिक्कन चुनमुन हेबाक मुदा नीचाँसँ खलओदार केने जेबाक विवरण देल गेल अछि।
नपनामे स्त्रीक काजक स्वरूप तय कएल गेल छै। अखनो जनगणना कालमे सरकार घरक काजकेँ आमदनीमे नै जोड़ैत अछि, आ ऐ कथामे अन्त होइए जखन एकटा स्त्रीक चर्च अबैए जे नोकरीयो करैए आ घरक काजो।  

आइ काल्हि जखन लोकक जिनगी गति पकड़ि लेने अछि तखन विहनि कथाक महत्व बढ़ि गेल अछि। मुन्नाजी विहनि कथा लेल समर्पित छथि आ ई संग्रह हुनकर ऐ समर्पणक गुणात्मक अभिव्यक्ति छन्हि।
विदेह सम्मान
-मैथिली नाटक/ संगीत/ कला/ मूर्तिकला/ फिल्मक समानान्तर दुनियाँक अभिलेखन आ सम्मान सेहो हएत विदेह सम्मानक घोषणा द्वारा
-ई घोषणा दिसम्बरक अन्त वा जनवरी २०१२ मे हएत
-मैथिली नाटक/ संगीत/ कला/ मूर्तिकला/ फिल्मक समानान्तर दुनियाँक अभिलेखन आ सम्मान कएल जाएत
-विदेह नाट्य उत्सव २०१२ क अवसरपर प्रदान कएल जाएत ई सम्मान।"

विदेह सम्मान
["पूनम मंडल आ प्रियंका झाक मैथिली न्यूज पोर्टल।
-अगस्त २०११ सँ सभ मास "ऐ मासक सभसँ नीक समदिया" सम्मानक घोषणा कएल जा रहल अछि
-समदिया- पूनम मंडल आ प्रियंका झाक मैथिली न्यूज पोर्टल। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक-सूचना-सम्पर्क-समाद पूनम मंडल आ प्रियंका झा। - द्वारा "ऐ मासक सभसँ नीक समदिया"क घोषणा सभ मास भऽ रहल अछि
- सालक अन्तमे "सर्वश्रेष्ठ मैथिली पत्रकारिता" लेल ऐ १२ टा देल सम्मानमे सँ सर्वश्रेष्ठकेँ "विदेह पत्रकारिता सम्मान" देल जाएत।
-अगस्त २०१२ मे हएत "विदेह पत्रकारिता सम्मान"क घोषणा।
विदेह सम्मान
समदिया- पूनम मंडल आ प्रियंका झाक मैथिली न्यूज पोर्टल।विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक-सूचना-सम्पर्क-समाद पूनम मंडल आ प्रियंका झा।
अपन इलाकाक कोनो समाचार ऐ अन्तर्जाल (http://esamaad.blogspot.com/)पर देबा लेल , समाचार poonamberma@gmail.com वा priyanka.rachna.jha@gmail.com पर पठाउ वा एतए http://www.facebook.com/groups/samadiya/ फेसबुकपर राखू।"]

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता (नेपाल देशक भाषा-साहित्य,  दर्शन, संस्कृति आ सामाजिक विज्ञानक क्षेत्रमे  सर्वोच्च सम्मान)

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता
श्री राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' (2010)
श्री राम दयाल राकेश (1999)
श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव (1994)

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान मानद सदस्यता
स्व. सुन्दर झा शास्त्री

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान आजीवन सदस्यता
श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव

फूलकुमारी महतो मेमोरियल ट्रष्ट काठमाण्डू,
 नेपालक सम्मान
फूलकुमारी महतो मैथिली साधना सम्मान २०६७ - मिथिला नाट्यकला परिषदकेँ
फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ - सप्तरी राजविराजनिवासी श्रीमती मीना ठाकुरकेँ
फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ -बुधनगर मोरङनिवासी दयानन्द दिग्पाल यदुवंशीकेँ
साहित्य अकादेमी  फेलो- भारत देशक सर्वोच्च साहित्य सम्मान (मैथिली)
           १९९४-नागार्जुन (स्व. श्री वैद्यनाथ मिश्र यात्री १९११-१९९८ ) , हिन्दी आ मैथिली कवि।
           २०१०- चन्द्रनाथ मिश्र अमर (१९२५- ) - मैथिली साहित्य लेल।

साहित्य अकादेमी भाषा सम्मान
 ( क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य आ गएर मान्यताप्राप्त भाषा लेल):-
           २०००- डॉ. जयकान्त मिश्र (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।)
           २००७- पं. डॉ. शशिनाथ झा (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।)
            पं. श्री उमारमण मिश्र

साहित्य अकादेमीक टैगोर साहित्य पुरस्कार
२०११- जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, लघु कथा संग्रह)
साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली
१९६६- यशोधर झा (मिथिला वैभव, दर्शन)
१९६८- यात्री (पत्रहीन नग्न गाछ, पद्य)
१९६९- उपेन्द्रनाथ झा व्यास” (दू पत्र, उपन्यास)
१९७०- काशीकान्त मिश्र मधुप” (राधा विरह, महाकाव्य)
१९७१- सुरेन्द्र झा सुमन” (पयस्विनी, पद्य)
१९७३- ब्रजकिशोर वर्मा मणिपद्म” (नैका बनिजारा, उपन्यास)
१९७५- गिरीन्द्र मोहन मिश्र (किछु देखल किछु सुनल, संस्मरण)
१९७६- वैद्यनाथ मल्लिक विधु” (सीतायन, महाकाव्य)
१९७७- राजेश्वर झा (अवहट्ठ: उद्भव ओ विकास, समालोचना)
१९७८- उपेन्द्र ठाकुर मोहन” (बाजि उठल मुरली, पद्य)
१९७९- तन्त्रनाथ झा (कृष्ण चरित, महाकाव्य)
१९८०- सुधांशु शेखर चौधरी (ई बतहा संसार, उपन्यास)
१९८१- मार्कण्डेय प्रवासी (अगस्त्यायिनी, महाकाव्य)
१९८२- लिली रे (मरीचिका, उपन्यास)
१९८३- चन्द्रनाथ मिश्र अमर” (मैथिली पत्रकारिताक इतिहास)
१९८४- आरसी प्रसाद सिंह (सूर्यमुखी, पद्य)
१९८५- हरिमोहन झा (जीवन यात्रा, आत्मकथा)
१९८६- सुभद्र झा (नातिक पत्रक उत्तर, निबन्ध)
१९८७- उमानाथ झा (अतीत, कथा)
१९८८- मायानन्द मिश्र (मंत्रपुत्र, उपन्यास)
१९८९- काञ्चीनाथ झा किरण” (पराशर, महाकाव्य)
१९९०- प्रभास कुमार चौधरी (प्रभासक कथा, कथा)
१९९१- रामदेव झा (पसिझैत पाथर, एकांकी)
१९९२- भीमनाथ झा (विविधा, निबन्ध)
१९९३- गोविन्द झा (सामाक पौती, कथा)
१९९४- गंगेश गुंजन (उचितवक्ता, कथा)
१९९५- जयमन्त मिश्र (कविता कुसुमांजलि, पद्य)
१९९६- राजमोहन झा (आइ काल्हि परसू, कथा संग्रह)
१९९७- कीर्ति नारायण मिश्र (ध्वस्त होइत शान्तिस्तूप, पद्य)
१९९८- जीवकान्त (तकै अछि चिड़ै, पद्य)
१९९९- साकेतानन्द (गणनायक, कथा)
२०००- रमानन्द रेणु (कतेक रास बात, पद्य)
२००१- बबुआजी झा अज्ञात” (प्रतिज्ञा पाण्डव, महाकाव्य)
२००२- सोमदेव (सहस्रमुखी चौक पर, पद्य)
२००३- नीरजा रेणु (ऋतम्भरा, कथा)
२००४- चन्द्रभानु सिंह (शकुन्तला, महाकाव्य)
२००५- विवेकानन्द ठाकुर (चानन घन गछिया, पद्य)
२००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा)
२००७- प्रदीप बिहारी (सरोकार, कथा)
२००८- मत्रेश्वर झा (कतेक डारि पर, आत्मकथा)
२००९- स्व.मनमोहन झा (गंगापुत्र, कथासंग्रह)
२०१०-श्रीमति उषाकिरण खान (भामती, उपन्यास)
२०११- श्री उदयचन्द्र झा "विनोद" (अपक्ष, कविता संग्रह)

साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार
१९९२- शैलेन्द्र मोहन झा (शरतचन्द्र व्यक्ति आ कलाकार-सुबोधचन्द्र सेन, अंग्रेजी)
१९९३- गोविन्द झा (नेपाली साहित्यक इतिहास- कुमार प्रधान, अंग्रेजी)
१९९४- रामदेव झा (सगाइ- राजिन्दर सिंह बेदी, उर्दू)
१९९५- सुरेन्द्र झा सुमन” (रवीन्द्र नाटकावली- रवीन्द्रनाथ टैगोर, बांग्ला)
१९९६- फजलुर रहमान हासमी (अबुलकलाम आजाद- अब्दुलकवी देसनवी, उर्दू)
१९९७- नवीन चौधरी (माटि मंगल- शिवराम कारंत, कन्नड़)
१९९८- चन्द्रनाथ मिश्र अमर” (परशुरामक बीछल बेरायल कथा- राजशेखर बसु, बांग्ला)
१९९९- मुरारी मधुसूदन ठाकुर (आरोग्य निकेतन- ताराशंकर बंदोपाध्याय, बांग्ला)
२०००- डॉ. अमरेश पाठक, (तमस- भीष्म साहनी, हिन्दी)
२००१- सुरेश्वर झा (अन्तरिक्षमे विस्फोट- जयन्त विष्णु नार्लीकर, मराठी)
२००२- डॉ. प्रबोध नारायण सिंह (पतझड़क स्वर- कुर्तुल ऐन हैदर, उर्दू)
२००३- उपेन्द दोषी (कथा कहिनी- मनोज दास, उड़िया)
२००४- डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह मौन” (प्रेमचन्द की कहानी-प्रेमचन्द, हिन्दी)
२००५- डॉ. योगानन्द झा (बिहारक लोककथा- पी.सी.राय चौधरी, अंग्रेजी)
२००६- राजनन्द झा (कालबेला- समरेश मजुमदार, बांग्ला)
२००७- अनन्त बिहारी लाल दास इन्दु” (युद्ध आ योद्धा-अगम सिंह गिरि, नेपाली)
२००८- ताराकान्त झा (संरचनावाद उत्तर-संरचनावाद एवं प्राच्य काव्यशास्त्र-गोपीचन्द नारंग, उर्दू)
२००९- भालचन्द्र झा (बीछल बेरायल मराठी एकाँकी-  सम्पादक सुधा जोशी आ रत्नाकर मतकरी, मराठी)
२०१०- डॉ. नित्यानन्द लाल दास ( "इग्नाइटेड माइण्ड्स" - मैथिलीमे "प्रज्वलित प्रज्ञा"- डॉ.ए.पी.जे. कलाम, अंग्रेजी)
२०११- श्री खुशीलाल झा (उपरवास कथात्रयी, रघुवीर चौधरीक गुजराती उपन्यास)

साहित्य अकादेमी मैथिली बाल साहित्य पुरस्कार
२०१०-तारानन्द वियोगीकेँ पोथी "ई भेटल तँ की भेटल"  लेल
२०११- ले.क. मायानाथ झा "जकर नारी चतुर होइ" लेल
साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार
२०११- श्री आनन्द कुमार झा (हठात परिवर्तन, नाटक)
प्रबोध सम्मान
प्रबोध सम्मान 2004- श्रीमति लिली रे (1933- )
प्रबोध सम्मान 2005- श्री महेन्द्र मलंगिया (1946- )
प्रबोध सम्मान 2006- श्री गोविन्द झा (1923- )
प्रबोध सम्मान 2007- श्री मायानन्द मिश्र (1934- )
प्रबोध सम्मान 2008- श्री मोहन भारद्वाज (1943- )
प्रबोध सम्मान 2009- श्री राजमोहन झा (1934- )
प्रबोध सम्मान 2010- श्री जीवकान्त (1936- )
प्रबोध सम्मान 2011- श्री सोमदेव (1934- )
प्रबोध सम्मान 2012- श्री चन्द्रभानु सिंह (१९२२- )
                                 श्री रामलोचन ठाकुर (१९४९- )
यात्री-चेतना पुरस्कार
२००० ई.- पं.सुरेन्द्र झा सुमन”, दरभंगा;
२००१ ई. - श्री सोमदेव, दरभंगा;
२००२ ई.- श्री महेन्द्र मलंगिया, मलंगिया;
२००३ ई.- श्री हंसराज, दरभंगा;
२००४ ई.- डॉ. श्रीमती शेफालिका वर्मा, पटना;
२००५ ई.-श्री उदय चन्द्र झा विनोद”, रहिका, मधुबनी;
२००६ ई.-श्री गोपालजी झा गोपेश, मेंहथ, मधुबनी;
२००७ ई.-श्री आनन्द मोहन झा, भारद्वाज, नवानी, मधुबनी;
२००८ ई.-श्री मंत्रेश्वर झा, लालगंज,मधुबनी
२००९ ई.-श्री प्रेमशंकर सिंह, जोगियारा, दरभंगा
२०१० ई.- डॉ. तारानन्द वियोगी, महिषी, सहरसा
२०११ ई.-  डॉ. राम भरोस कापड़ि भ्रमर (जनकपुर)

भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता
युवा पुरस्कार (२००९-१०) गौरीनाथ (अनलकांत) केँ मैथिली लेल।

भारतीय भाषा संस्थान (सी.आइ.आइ.एल.) , मैसूर रामलोचन ठाकुर:- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००३-०४ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) जा सकै छी, किन्तु किए जाउ- शक्ति चट्टोपाध्यायक बांग्ला कविता-संग्रहक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त  रमानन्द झा 'रमण':- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००४-०५ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) छओ बिगहा आठ कट्ठा- फकीर मोहन सेनापतिक ओड़िया उपन्यासक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त।

विदेह सम्मान
विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान
१.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ 
२०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल)
२०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल)
२.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ 
२०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह)
२०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह)
२०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक)
२०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्ला- मानिक बंद्योपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद)

 
नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ क घोषणा

 
नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ क घोषणा
अभि‍नय- मुख्य अभिनय ,
सुश्री शि‍ल्‍पी कुमारी, उम्र- 17 पि‍ता श्री लक्ष्‍मण झा
श्री शोभा कान्‍त महतो, उम्र- 15 पि‍ता- श्री रामअवतार महतो,

हास्‍य-अभिनय
सुश्री प्रि‍यंका कुमारी, उम्र- 16, पि‍ता- श्री वैद्यनाथ साह
श्री दुर्गानंद ठाकुर, उम्र- 23, पि‍ता- स्‍व. भरत ठाकुर

नृत्‍य
सुश्री सुलेखा कुमारी, उम्र- 16, पि‍ता- श्री हरेराम यादव
श्री अमीत रंजन, उम्र- 18, पि‍ता- नागेश्वर कामत

चि‍त्रकला
श्री पनकलाल मण्डल, उमेर- ३५, पिता- स्व. सुन्दर मण्डल, गाम छजना
श्री रमेश कुमार भारती, उम्र- 23, पि‍ता- श्री मोती मण्‍डल

संगीत (हारमोनियम)
श्री परमानन्‍द ठाकुर, उम्र- 30, पि‍ता- श्री नथुनी ठाकुर

संगीत (ढोलक)
श्री बुलन राउत, उम्र- 45, पि‍ता- स्‍व. चि‍ल्‍टू राउत

संगीत (रसनचौकी)
श्री बहादुर राम, उम्र- 55, पि‍ता- स्‍व. सरजुग राम

 
शिल्पी-वस्तुकला
श्री जगदीश मल्लिक,५० गाम- चनौरागंज
मूर्ति-मृत्तिका कला
श्री यदुनंदन पंडि‍त, उम्र- 45, पि‍ता- अशर्फी पंडि‍त
काष्ठ-कला
श्री झमेली मुखिया,पिता स्व. मूंगालाल मुखिया, ५५, गाम- छजना
किसानी-आत्मनिर्भर संस्कृति
श्री लछमी दास, उमेर- ५०, पिता स्व. श्री फणी दास, गाम वेरमा

अनचिन्हार आखर ( http://anchinharakharkolkata.blogspot.com ) द्वारा प्रायोजित "गजल कमला-कोसी-बगमती-महानंदा सम्मान" बर्ख 2011 लेल ओस्ताद सदरे आलम गौहर जीकेँ प्रदान कएल गेलैन्ह। एहि बेरुक मुख्यचयनकर्ता ओस्ताद सियाराम झा"सरस" छलखिन्ह।..


 

गजेन्द्र ठाकुर

ggajendra@videha.com
 
http://www.maithililekhaksangh.com/2010/07/blog-post_3709.html

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