१.
किशन कारीगर- घोटालाबला
पाइ २.
अजीत मिश्र-दीआबाती ३.
श्याम दरिहरे- ओबामा ओबामा ओबामा
किशन कारीगर- घोटालाबला
पाइ २.
अजीत मिश्र-दीआबाती ३.
श्याम दरिहरे- ओबामा ओबामा ओबामा
१
किशन कारीगर
घोटालाबला
पाइ
(हास्य कविता)
ई
पोटरी त हमरा सँ
उठने
नहि उठि रहल अछि
कनेक
अहूँ जोड़ लगा दिय भाई
ई छी
घोटालावला पाई।
हम
पूछलियन ई की छी
ओ
हमरा कान में कहलनि
कोयला
बेचलाहा सभटा रुपैया
हम
एही पुत्री में रखने छि
.
हमरा
सात पुस्त लोकक गुजर
एही
रुप्पैया स चली जायत
हम
धरती में पैर नहीं रोपाब आई
इ छि
घोटालावला पाई।
चुपेचाप
थोड़ेक अहूँ लिय
मुदा
केकरो सँ कहबई नहि भाई
सरकारी
संपित हम केलियई राई-छाई
इ छि घोटालावला पाई।
कोयला
भूखंडक बाँट-बखरा दुआरे
मंत्रिमंडल
के सर्जरी भेल
लोक
हो-हल्ला
केलक मुदा
कोयला
दलाली के नफ्फा हमरे ता भेल।
फेर
मंत्री पद भेटैत की नहि?
ताहि
दुआरे चुपेचाप पोटरी बनेलौहं
सभटा
अपने नाम केने छि भाई
ई छी
घोटालावला पाई।
देखावटी
दुआरे सरकारी खजाना पर
बड़का-बड़का ताला लटकने छि
मुदा
राति होएते देरी हमीह
भेष
बदली खजाना लूटि लैत छी।
मंत्रीजी
के कहल के नहि मानत?
सरकारी
मामला में कियक किछु बाजत?
चुपेचाप
सभटा काज होयत छैक औ भाई
ई छी घोटालावला पाई।
२
अजीत मिश्र
दी न-हीन हो वा धनवान
आ शा भरल सभे जहान
बा ट-घाटमे गर्दमिशान
ती रभुक्तिमे भरल महान।
प कबान सङ हाथ मखान
र ङ्ग-रङ्गकेर पाबि समान
ब लिहारी एहि परब जुगाइन।
म ङ्गल चहु, मिथिला महान
हा थ माथ पर सभे जहान
न त-मति हमसभ, हे भगवान।
३
श्याम दरिहरेओबामा ओबामा ओबामा
ओबामा ओबामा ओबामा
हंगामा हंगामा हंगामा
जीतल ओबामा हारल अछि मेकन
हारि गेल पालिन आ जीति गेल बैदन
अमेरिका तऽ सहजे सुकराती नचैए
दुनियाक लोक सेहो फगुआ गबैेए
गोरकीक उपर करीक्कीक भाव बढ़ल
व्हाइट हाउसक कुर्सी पर बलैकमैनक दाव लहल
उजरत इराक नइ
फनकत इरान नइ
डूबत ने बैंक कोनो एआइजी की लेहमैन
दुनियामे समताक डंका पिटायत
लादेनके मानवसऽ इरखा मिटायत
फूटत ने बम कतउ
मरत ने लोक कतउ
सस्तेमे तेल आ सस्तेमे गैस भेटत
मड़रके बेटा आब नैनो चलायत
सुकनीक देहमे एन्जलीना फुलायत
चिबायब ने रोटी
चाभब आब कूकी
गंगाक बदला पेप्सीएमे नहायब
गेनमाक बेटीके चान पर पठाएब
बुधना आब घोंघाक माला ने पहिरत
गीधना ने कहिओ भैंसी चरायत
चन्डेभाइ किनि लेता जीन्स आ टी शर्ट
भौजी के परसुए हालीउड घुमायब।
थीर रहू धीर धरू मोन भरमाउ नइ
पानिएमे माछ अछि कुट्टी लुटाउ नइ
कइओबेर अब्दुल्ला अछि नाचल अनठीया बिआहमे
हरबड़मे खेयाली पुलाव बरकाउ नइ
देखल छथि काटर आ देखले छथि क्लिंटन
देखि लेलहुँ बुश देखलहुँ हुनकर फुस्स
ओबामाक दीआमे तेल कते राखल अछि
ओकरे ता अटकर लगाबऽ तऽ दीअऽ
नवे अछि घोड़ा परेखऽ तऽ दीअऽ
खाइए कते आ बहैए कते
दुलकी चलैए की सरपट भगैए
सम्हारत इरान की सुतारत पाकिस्तान
कोरिया खेहारत की चीन परतारत
काबुल बचायत की पछारत गऽ रूस
की लेने देने पड़ि जायत
हरो पालो थुस्स।
विदेह नूतन अंक मिथिला कला संगीत
राजनाथ मिश्रचित्रमय मिथिला स्लाइड शो
चित्रमय मिथिला (https://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ )
उमेश मण्डलमिथिलाक वनस्पति स्लाइड शो
मिथिलाक जीव-जन्तु स्लाइड शो
मिथिलाक जिनगी स्लाइड शो
मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव जन्तु/ मिथिलाक जिनगी (https://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ )
विदेह नूतन अंक गद्य-पद्य
भारती
१. मोहनदास (दीर्घकथा):लेखक: उदय प्रकाश (मूल
हिन्दीसँ मैथिलीमे अनुवाद विनीत उत्पल)
२.छिन्नमस्ता- प्रभा खेतानक हिन्दी उपन्यासक सुशीला झा द्वारा मैथिली
अनुवाद
३.कनकमणि
दीक्षित (मूल नेपालीसँ मैथिली अनुवाद श्रीमती रूपा धीरू आ श्री धीरेन्द्र
प्रेमर्षि)
बालानां
कृते
१.
जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’-बाल गजल २.
राजदेव मण्डल- बाल कविता
१
जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’
बाल
गजल
१
भोरहि
सभकें आबि जगा
कोइली
हमरा आंगन आ।
घ’रहुमे भऽ गेल दुगोला
सभकें
प्रेेमक पाठ पढ़ा।
बात-बातमे
खापड़ि फूटै
सभकें
सुंदर बोल सिखा।
स’भ घ’र लागय अपने
एहेन
स्नेहक दीप जड़ा।
लक्ष्मी
आबथु स’भ
घ’रमे
दरिद्रताकें
दूर भगा।
मच्छर
भरि गांमे पैसल
सभ
जनकें डेंगूसं बचा।
२
कत’ खसलियै यौ पापा
कोना
क’एलियै
यौ पापा ।
पान
तमाकुल गुटका खेलौं
दांत
गमेलियै यौ पापा ।
लीभर
काज करत कहिया धरि
शराब पिलियै यौ पापा ।
खोलि
देलक इसकूल घ’रमे
कोना
कमेलियै यौ पापा ।
महल
छोड़िक’ जहलमे
एलौं
कते
लुटलियै यौ पापा ।
लोकतंत्रकें
जर्जर केलियै
मूस
बनलियै यौ पापा।
२
राजदेव मण्डल
बाल
कविता
छीपपर
दीप
नमगर
बाँसक छीप
पर
नाचैत दीप
अपने
देहकेँ जारि-जारि
तैयो
टेमीकेँ सम्हारि
अन्हारकेँ
ललकारि
हवासँ
करैत मारि
एक्के
धूनमे चलि रहल
समताक
लेल गलि रहल
जेतबे
क्षमता छै तेतबे
दोग-दागमे
फैलि रहल
बटोहीकेँ
देखबैत बाट
हरा
ने जाइ कहीं कुबाट।
देत
प्रकाश सभकेँ
लड़ैत
अन्हारसँ भरि राति
किन्नौं
नै देखतै केकरो
रंग, रूप आ जाति।
बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय
श्लोक
१.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू
हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक
चाही।
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये
सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते
करदर्शनम्॥
करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि,
करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित
छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक।
२.संध्या काल दीप लेसबाक काल-
दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये
जनार्दनः।
दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः
सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥
दीपक मूल भागमे ब्रह्मा,
दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित
छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार।
३.सुतबाक काल-
रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं
वृकोदरम्।
शयने यः स्मरेन्नित्यं
दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥
जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम,
कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़
आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत
छन्हि।
४. नहेबाक समय-
गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन्
सन्निधिं कुरू॥
हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती,
नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी धार। एहि जलमे
अपन सान्निध्य दिअ।
५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव
दक्षिणम्।
वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र
सन्ततिः॥
समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे
भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि।
६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी
तथा।
पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं
महापातकनाशकम्॥
जे सभ दिन अहल्या,
द्रौपदी, सीता, तारा आऽ
मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च
विभीषणः।
कृपः परशुरामश्च सप्तैते
चिरञ्जीविनः॥
अश्वत्थामा,
बलि, व्यास, हनूमान्,
विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा
चिरञ्जीवी कहबैत छथि।
८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर
वासिनी
उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः।
सिद्धिः साध्ये सतामस्तु
प्रसादान्तस्य धूर्जटेः
जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥
९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला
सरस्वती।
अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि
जगत्त्रयम् ॥
१०. दूर्वाक्षत
मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय
२२, मंत्र २२)
आ
ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः।
षड्जः स्वरः॥
आ
ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः
शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒
पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां
निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो
नः॑ कल्पताम्॥२२॥
मन्त्रार्थाः
सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव।
ॐ
दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव।
हे
भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ
दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक
सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि।
अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा
परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश
होए आ’ मित्रक उदय होए॥
मनुष्यकें
कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि।
एहिमे
वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि।
अन्वय-
ब्रह्म॑न्
- विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म
रा॒ष्ट्रे
- देशमे
ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म
विद्याक तेजसँ युक्त्त
आ
जा॑यतां॒- उत्पन्न होए
रा॑ज॒न्यः-राजा
शुरे॑ऽ–बिना डर बला
इषव्यो॒-
बाण चलेबामे निपुण
ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ
तारण दय बला
म॑हार॒थो-पैघ
रथ बला वीर
दोग्ध्रीं-कामना(दूध
पूर्ण करए बाली)
धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः
धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित
सप्तिः॒-घोड़ा
पुर॑न्धि॒र्योवा॑-
पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री
जि॒ष्णू-शत्रुकेँ
जीतए बला
र॑थे॒ष्ठाः-रथ
पर स्थिर
स॒भेयो॒-उत्तम
सभामे
युवास्य-युवा
जेहन
यज॑मानस्य-राजाक
राज्यमे
वी॒रो-शत्रुकेँ
पराजित करएबला
निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त
कार्यमे
नः-हमर
सभक
प॒र्जन्यों-मेघ
वर्षतु॒-वर्षा
होए
फल॑वत्यो-उत्तम
फल बला
ओष॑धयः-औषधिः
पच्यन्तां-
पाकए
योगेक्ष॒मो-अलभ्य
लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा
नः॑-हमरा
सभक हेतु
कल्पताम्-समर्थ
होए
ग्रिफिथक
अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला,
राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय,
दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य
आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी।
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