बालानां कृते
१.
पंकज चौधरी "नवलश्री"- बाल गजल
१-३ २.
अमित मिश्र- बाल कविता १-३
पंकज चौधरी "नवलश्री"- बाल गजल
१-३ २.
अमित मिश्र- बाल कविता १-३
१
पंकज चौधरी "नवलश्री"
बाल गजल-१
संगी सभके संगे लै छी
चल भैया पिकनिक मनबै छी
माँ देतै चिक्कस आ चाउर
बांकी बाबू के कहि दै छी
चुल्हा जारनि बासन आनै
आ सभकिछु मिलिजुलि पकबै छी
तीमन करुगर मिठगर तस्मइ
पूरी आ हलुआ बनबै छी
केरा पातक थारी सुन्नर
तूं सभ बैसै हम परसै छी
"नवलसँ" कहि दे एतै ओहो
झगड़ा-झंझट सभ बिसरै छी
*मात्रा
क्रम-आठ टा
दीर्घ सभ पांतिमे
©पंकज चौधरी "नवलश्री"
बाल गजल-२
देख भेलै भोर भैया
आब आलस छोड़ भैया
दाय-बाबा माय-बाबू
लाग सभके गोर भैया
गाछ नीमक ऊँच बड़ छै
चढ़ि क’ दतमनि तोड़ भैया
धो क’ मुँह चल ने नहा ली
भूख मारय जोर भैया
दालि बेशी भात ले कम
खूब खो तिलकोर भैया
खा क’ पुनि पोथी ल’ बैसी
चल पढ़ै छी थोड़ भैया
चल चलै छी खेल खेलब
बनि सिपाही-चोर भैया
ई सिनेहक ताग कहियो
होय नै कमजोर भैया
तों
“नवल” भैया
हमर छें
हम बहिनिया तोर भैया
*बहरे रमल/मात्रा क्रम-२१२२+२१२२
©पंकज चौधरी “नवलश्री”
बाल गजल-३
चार पर कुचरैत कौआ
सभ सनेशा दैत कौआ
टाट पर बैसल त' कखनो
मेघमे उमकैत कौआ
ताकि गोपी लोल मारै
गाछ पर फुद्कैत कौआ
काग दस टा मूस एगो
ताहि लै झगड़ैत कौआ
छीन हाथक सभ जिलेबी
उड़ल पुनि बहसैत कौआ
ऐंठ बासन देखि दौगल
अन्न लै तरसैत कौआ
भोज आँगन भाग जागै
पात पर लुधकैत कौआ
सूपमे खुद्दी पसारल
दाय छथि उड़बैत कौआ
देखि सूतल दाय के पुनि
सूप दिस ससरैत कौआ
"नवल" कागक अजब लीला
लोक के नचबैत कौआ
*बहरे रमल/मात्रा क्रम-२१२२+२१२२
©पंकज चौधरी "नवलश्री"
२
अमित मिश्रकरियन ,समस्तीपुर, मिथिला ,बिहार
अमित मिश्र
बाल कविता
1
पतंग बनाबै रे
पन्नी कागत फाड़ै रे
सुन्नर पतंग बानबै रे
मैदासँ बाटी भरै रे
लाल आगिपर बरकाबै रे
लस-लस लेइ बनाबै रे
झारुक काठी आनै रे
सीधा आ गोल राखै रे
कागतक चिप्पी साटै रे
लम्बा कागत काटै रे
कोणपर पुँछरी बनाबै रे
बहुते धागा आनै रे
दू दिश भूर करै रे
चल गुड्डीकेँ नाथै रे
कनिये काल सुखाबै रे
दैवा पवन बहाबै रे
चल पतंग उड़ाबै रे
बाधे बाधे दौड़ै रे
अम्बरमे पतंग नाचै रे
नीच्चा हमहूँ सब गाबै रे
सब मिल पतंग बनाबै रे
२
बाबाकेँ
मोटका लाठी बाबाकेँ
बड़का बाटी बाबाकेँ
घर आँगन गुँजि रहल
प्रेम भरल हँसी बाबाकेँ
भरल चुनौटी बाबाकेँ
कान कनैठी बाबाकेँ
नव नव सबकसँ छै भरल
सबटा देल पोथी बाबाकेँ
कुर्ता -धोती बाबाकेँ
कण्ठीक मोती बाबाकेँ
एखनो सबटा इयाद अछि
खिस्सा-पिहानी बाबाकेँ
डाँर झूकल बाबाकेँ
दाँत टूटल बाबाकेँ
कहिया एथिन भगवान घरसँ
कते साल भेल देखल बाबाकेँ
३
उसनल अण्डाक न्याय
एकटा राजा टुनटुन पूरमे
राज करै छल बड नीकसँ
एक दिन घटलै अजगुत घटना
सोनमाकेँ पकड़ने एलै कोनमा
कोनमा कहलक सोनमाकेँ देखू सरकार
चोरा कऽ खेलक उसनल अण्डा राति अन्हार
अण्डासँ मूर्गी बहरैतै
ओहिसँ बहुते मुर्गी होइतै
बेच बेच खूब पाइ कमैतौं
बड़का गाड़ी बंगला किनितौं
एकरा दिऔ सजा कड़ाइ
हमरा दिआबू सबटा पाइ
राजा बहुते सोचमे पड़ल
धियानसँ सबटा गप बूझल
बूझि गेल कोनमाकेँ चालि
बूधिक काल चलेलक हालि-हालि
राजा कहलक सून रै कोनमा
दौड़ल चलि जो अपन अंगना
बबूरक गाछपर आम छै फरल
तोड़ने आबें सबटा पाकल
कोनमाकेँ माँथा चकरेलै
बबूरमे आम कतऽसँ एलै
राजाकेँ निज शंका कहलक
राज तखन गप बूझेलक
जहिना बबूरमे नै आम फड़ै छै
तहिना उसनल अण्डासँ नै मुर्गी जनमै छै
कोनमा मानलक अपन गलती
सोनमासँ भऽ गेलै दोस्ती
न्याय देखि बड ताली बाजल
नाँगरि दाबि कऽ कोनमा भागल
बच्चा
लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक
१.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने)
सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही,
आ’ ई श्लोक बजबाक चाही।
कराग्रे वसते
लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो
ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥
करक आगाँ
लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन
करबाक थीक।
२.संध्या काल दीप लेसबाक काल-
दीपमूले स्थितो
ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः।
दीपाग्रे
शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥
दीपक मूल भागमे
ब्रह्मा, दीपक
मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति!
अहाँकेँ नमस्कार।
३.सुतबाक काल-
रामं स्कन्दं
हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्।
शयने यः
स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥
जे सभ दिन
सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
४.
नहेबाक समय-
गङ्गे च यमुने
चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु
कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥
हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ।
५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।
वर्षं तत्
भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥
समुद्रक
उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि।
६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा।
पञ्चकं ना
स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥
जे सभ दिन
अहल्या, द्रौपदी,
सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः।
कृपः
परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥
अश्वत्थामा,
बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम-
ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि।
८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी
उग्रेन तपसा
लब्धो यया पशुपतिः पतिः।
सिद्धिः साध्ये
सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः
जाह्नवीफेनलेखेव
यन्यूधि शशिनः कला॥
९.
बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती।
अपूर्णे पंचमे
वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥
१०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र
२२)
आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः।
स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥
आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे
रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं
धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒
युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो
न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥
मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः।
शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव।
ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव।
हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ
विद्यार्थी उत्पन्न होथि,
आ’
शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन
करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा
त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण
भाषण देबयबला आ’
नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा
परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश
होए आ’ मित्रक
उदय होए॥
मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे
कएल गेल अछि।
एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि।
अन्वय-
ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म
रा॒ष्ट्रे - देशमे
ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त
आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए
रा॑ज॒न्यः-राजा
शुरे॑ऽ–बिना डर बला
इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण
ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला
म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर
दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली)
धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी
र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद
ना॒शुः-आशुः-त्वरित
सप्तिः॒-घोड़ा
पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण
करए बाली र्योवा॑-स्त्री
जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला
र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर
स॒भेयो॒-उत्तम सभामे
युवास्य-युवा जेहन
यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे
वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला
निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे
नः-हमर सभक
प॒र्जन्यों-मेघ
वर्षतु॒-वर्षा होए
फल॑वत्यो-उत्तम फल बला
ओष॑धयः-औषधिः
पच्यन्तां- पाकए
योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा
नः॑-हमरा सभक हेतु
कल्पताम्-समर्थ होए
ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे
ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा
देथि, फल देय
बला गाछ पाकए, हम सभ
संपत्ति अर्जित/संरक्षित
करी।
8.VIDEHA
FOR NON RESIDENTS
8.1 to 8.3 MAITHILI
LITERATURE IN ENGLISH
8.1.4.NAAGPHANS (IN ENGLISH)- SHEFALIKA
VERMA translated by Dr. Rajiv Kumar Verma and Dr. Jaya Verma
विदेह
नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन
इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष प्रोजेक्टकेँ
आगू
बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ।
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